भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान | ICAR-Indian Agricultural Research Institute
ICAR-IARI, New Delhi

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भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
ICAR-Indian Agricultural Research Institute

उद्यानिकी विज्ञान स्कूल

परिचय

परिचय भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भा. कृ. अनु. सं. ) में उद्यानिकी विज्ञान स्कूल का संचालन 04 प्रमुख संभागों , एक इकाई (CPCT) तथा 05 क्षेत्रीय स्टेशनों के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें कुल 72 वैज्ञानिक कार्यरत हैं। यह विद्यालय मुख्यतः फूलों, सब्ज़ियों एवं फलों के उत्पादन हेतु नई किस्मों एवं प्रौद्योगिकियों के विकास पर केंद्रित है। संरक्षित खेती (Protected Cultivation) भी विद्यालय के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक है। हाल के वर्षों में फलों एवं सब्ज़ियों की अनेक संभावनाशील किस्में विकसित की गई हैं। विद्यालय के विद्यार्थियों को बीज एवं गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के उत्पादन, कटाई-पूर्व एवं कटाई-पश्चात प्रबंधन, पर्यावरणीय समाधान तथा लैंडस्केपिंग के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षण दिया जाता है।

उद्यानिकी विज्ञान विभाग

उद्यानिकी विज्ञान के विभाग भारतीय कृषि की वृद्धि, पोषण सुरक्षा, आजीविका सुरक्षा तथा सजीवता में उद्यानिकी फसलों के बढ़ते महत्व को हाल के वर्षों में विशेष मान्यता मिली है। इसी को ध्यान में रखते हुए, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने वर्ष 2012 में उद्यानिकी विज्ञान विद्यालय की स्थापना की, ताकि पारंपरिक एवं जैव-प्रौद्योगिकीय उपकरणों का उपयोग करते हुए सब्ज़ी, फल एवं पुष्प फसलों के सुधार हेतु समन्वित एवं केंद्रित अनुसंधान कार्यक्रम चलाए जा सकें; खुले एवं संरक्षित वातावरण के लिए उत्पादन प्रौद्योगिकियों का विकास किया जा सके; कटाई-पश्चात प्रौद्योगिकी विकल्पों की रूपरेखा तैयार की जा सके तथा विभिन्न प्रौद्योगिकीय विकल्पों का प्रभावी प्रसार कर कृषक समुदाय की समृद्धि सुनिश्चित की जा सके। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान उद्यानिकी विज्ञान में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं उसके व्यावसायिक अनुप्रयोग का अग्रदूत रहा है। इस संस्थान द्वारा विकसित किस्में/संकर पूरे देश में व्यापक रूप से अपनाई गई हैं तथा हाल के वर्षों में भारत में निजी सब्ज़ी बीज उद्योग के विकास का आधार भी बनी हैं। YVMV प्रतिरोधी भिंडी ‘पूसा सावनी’, टमाटर ‘पूसा रूबी’, बैंगन ‘पूसा क्रांति’, लौकी ‘पूसा नवीन’, फूलगोभी ‘पूसा स्नोबॉल K-1’, प्याज़ ‘पूसा रेड’ एवं गाजर ‘पूसा रुधिरा’ ने देश में सब्ज़ी उत्पादन में क्रांति ला दी है। उच्च सघनता रोपण हेतु उपयुक्त, नियमित फल देने वाली आम की किस्में ‘मल्लिका’ एवं ‘अमरपाली’ पूरे देश में फैली हैं और आज भी अत्यधिक मांग में हैं। ‘पूसा नारंगी गेंदा’ एवं ‘पूसा बसंती गेंदा’ ने देशभर में गेंदा की खेती को लोकप्रिय बनाया। कम लागत वाला ‘पूसा शून्य ऊर्जा शीत कक्ष’ शीघ्र नष्ट होने वाली फसलों के भंडारण जीवन को बढ़ाकर किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हुआ है।

उद्यानिकी विज्ञान विभाग

सब्ज़ी विज्ञान
फल एवं उद्यानिकी प्रौद्योगिकी
पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केपिंग
कटाई-पश्चात प्रौद्योगिकी

इकाई

संरक्षित खेती प्रौद्योगिकी केंद्र (CPCT)

क्षेत्रीय स्टेशन

कटराईं

भा.कृ.अनु.प –भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान


पूसा परिसर,
नई दिल्ली - 110012
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