भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान | ICAR-Indian Agricultural Research Institute
ICAR-IARI, New Delhi

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भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
ICAR-Indian Agricultural Research Institute

दृष्टि एवं मिशन

विजन
विज्ञान-आधारित, सतत एवं वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी कृषि के लिए नेतृत्व प्रदान करना, ताकि खाद्य, पोषण एवं आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मिशन
विज्ञान की नई सीमाओं का अन्वेषण करना तथा मानव संसाधनों का विकास करना, ताकि प्रौद्योगिकी विकास और नीति मार्गदर्शन में नेतृत्व प्रदान किया जा सके और एक सशक्त एवं लचीली कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिले, जो उत्पादक, पर्यावरण–अनुकूल, सतत, आर्थिक रूप से लाभकारी तथा सामाजिक रूप से न्यायसंगत हो। इस मिशन की प्राप्ति हेतु संस्थान ने निम्नलिखित दायित्व अपनाए हैं:
 
  • उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि हेतु क्षेत्रीय एवं उद्यानिकी फसलों पर मौलिक, रणनीतिक तथा अग्रिम (पूर्वानुमानात्मक) अनुसंधान।
  • सतत कृषि उत्पादन प्रणाली के लिए संसाधन–उपयोग दक्ष एकीकृत फसल प्रबंधन प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु अग्रणी क्षेत्रों में अनुसंधान।
  • कृषि विज्ञान के क्षेत्र में स्नातकोत्तर शिक्षा एवं मानव संसाधन विकास के माध्यम से शैक्षणिक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में कार्य करना।
  • नवीन अवधारणाओं एवं दृष्टिकोणों का विकास कर तथा गुणवत्ता एवं मानकों के लिए राष्ट्रीय संदर्भ बिंदु के रूप में कार्य करते हुए कृषि अनुसंधान, शिक्षा, विस्तार, प्रौद्योगिकी मूल्यांकन एवं हस्तांतरण में राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदान करना।

लक्ष्य एवं उद्देश्य

  • पादप आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग पर विशेष बल देना, जिसमें कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीव, सायनो-बैक्टीरिया एवं कीट संसाधनों का संरक्षण शामिल हो, ताकि विशेष रूप से संकर किस्मों सहित फसलों के दक्ष, उत्पादक एवं स्थिर जीनोटाइप विकसित किए जा सकें तथा जैव-ऊर्जात्मक दक्षता में सुधार हो।
  • कृषि फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता से संबंधित प्रक्रियाओं पर ज्ञान का सृजन करना, जिससे अनुसंधान दर्शन, अवधारणाओं, कार्यविधियों, सामग्रियों एवं प्रौद्योगिकियों का विकास हो सके।
  • उत्पादन प्रणालियों की बेहतर समझ प्राप्त करने तथा पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य जोखिम को कम करते हुए उन्हें अधिक सतत बनाने के लिए प्रणाली दृष्टिकोण, फसल मॉडलिंग, जैव-संकेतक, नाभिकीय उपकरण, रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस का विकास एवं उपयोग करना, समग्र पारिस्थितिक एवं सामाजिक-आर्थिक परिप्रेक्ष्य में।
  • प्रतिकूल परिस्थितियों में कृषि से संबंधित समस्याओं तथा उपेक्षित/अनाथ फसलों पर अधिक ध्यान देना।
  • कृषि से संबंधित मूल एवं सामाजिक विज्ञानों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना तथा प्रबंधन विज्ञान और संचार प्रणालियों का उपयोग कर समग्र दक्षता में सुधार करना।
  • कटाई-पश्चात प्रौद्योगिकी, कृषि-प्रसंस्करण, उत्पाद विकास, मूल्य संवर्धन एवं कृषि जिंसों, उप-उत्पादों, कृषि अपशिष्टों तथा नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के उपयोग पर अनुसंधान में क्षमताओं का विकास करना।
  • आणविक जीवविज्ञान एवं जैव-प्रौद्योगिकी जैसी नई एवं उभरती अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना, आधुनिक उपकरणों से युक्त अंतर्विषयी उत्कृष्टता केंद्रों का विकास करना तथा प्रणालीगत अनुसंधान को बढ़ावा देना।

  • उत्कृष्टता को बढ़ावा देना, उच्च मानकों को प्रोत्साहित करना तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों को भविष्य की आवश्यकताओं और अवसरों के अनुरूप उन्मुख करना।
  • पाठ्यक्रमों में भौतिक, जैविक एवं सामाजिक विज्ञानों को सुदृढ़ करना तथा जैव-प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर अनुप्रयोग एवं सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यावरण विज्ञान, प्रबंधन विज्ञान, कटाई-पश्चात प्रौद्योगिकी, कृषि जैव-विविधता एवं आनुवंशिक संसाधन जैसे अग्रणी क्षेत्रों को शामिल करना।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विशेष रूप से नई एवं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में पोस्ट-डॉक्टोरल अनुसंधान, सतत शिक्षा, संकाय उन्नयन तथा मानव संसाधन विकास के अवसर प्रदान करना।
  • उद्यमशील कौशल के संवर्धन एवं कृषि के व्यावसायीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु गैर-औपचारिक प्रशिक्षण को सुदृढ़ करना।

  • नवाचारी विस्तार मॉडलों का सृजन करना, उन्हें विकासात्मक मॉडलों के साथ समन्वित करना तथा क्षेत्रीय केंद्रों, विश्वविद्यालयों और राज्य विस्तार प्रणालियों के माध्यम से उनका प्रसार करना।
  • सहभागी दृष्टिकोण अपनाते हुए तथा संस्थान–ग्राम संपर्क कार्यक्रम को बढ़ावा देकर, किसान/ग्राहक उन्मुख खेत-स्तरीय अनुसंधान, प्रौद्योगिकी मूल्यांकन, परिष्करण एवं हस्तांतरण को प्रोत्साहित करना।
  • संचार अनुसंधान के विकास को प्रोत्साहित करना, ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वय स्थापित करना तथा अंतर्विभागीय एवं सहभागी दृष्टिकोणों के माध्यम से सूक्ष्म-योजना को सुदृढ़ करना।

भा.कृ.अनु.प –भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान


पूसा परिसर,
नई दिल्ली - 110012
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