भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान | ICAR-Indian Agricultural Research Institute
ICAR-IARI, New Delhi

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भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
ICAR-Indian Agricultural Research Institute

पादप संरक्षण

कृषि रसायन
स्टार्च (एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पॉलीसैकराइड पॉलिमर) पर कृत्रिम मोनोमर ग्राफ्ट करके हाइड्रोफिलिक पॉलिमर तैयार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य जल अवशोषण बढ़ाना और जल हानि को विलंबित करना है। हाल ही में विकसित कार्बोक्सीमेथाइल सेल्यूलोज आधारित कुछ पॉलिमरों ने लगभग 33,000% (m/m) जल अवशोषण दिखाया है। ये हाइड्रोजेल शुष्क/वर्षा-आश्रित कृषि, हाई-टेक उद्यानिकी एवं पुष्पोत्पादन, मृदा-रहित माध्यम में नर्सरी उत्पादन, मृदा सुधार, कृषि वानिकी, कृत्रिम लॉन एवं लैंडस्केप, छत की बागवानी आदि में उपयोगी हैं।
कृत्रिम कीटनाशी, नीम इमल्सीफाएबल कंसंट्रेट (EW), अजादिरैक्टिन-A कंसंट्रेट, नीम तेल माइक्रोइमल्शन/माइक्रोइमल्शन-फॉर्मिंग कंसंट्रेट तथा सामान्य परिस्थितियों में डाइहाइड्रोअजादिरैक्टिन-A कंसंट्रेट बनाने की प्रक्रियाएँ विकसित की गई हैं।
नीम पत्तियों के अर्क पर आधारित एक शाकनाशी संरचना विकसित की गई है, जो फालेरिस माइनर खरपतवार को नियंत्रित करती है और गेहूँ की वृद्धि को प्रभावित नहीं करती।
प्राकृतिक एवं कृत्रिम पॉलिमर, अकेले या अकार्बनिक निष्क्रिय पदार्थों के साथ मिलाकर, बीज आवरण (सीड कोट) के रूप में सफलतापूर्वक विकसित किए गए हैं। इनमें नीम मेलियासिन्स जैसे वनस्पति सक्रिय घटकों का उपयोग किया गया है। ऐसे बीज आवरण अंकुरण, जीवनीयता, रोपण क्षमता एवं स्फूर्ति में सुधार करते हैं तथा कवक/सूत्रकृमि/कीट संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
नीम तेल लेपित यूरिया (NOCU), पूसानीम गोल्डन यूरिया तथा नीम कड़वा लेपित यूरिया विकसित किए गए हैं। धान पर क्षेत्रीय परीक्षणों में 7–17% तक उपज वृद्धि दर्ज की गई।
डिलापिओल, जो Anethum sowa Roxb. के आवश्यक तेल में 20–40% तक पाया जाने वाला अवांछनीय घटक है, तथा उसका डाइहाइड्रो व्युत्पन्न, आयातित एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य सहक्रियक पाइपरोनिल ब्यूटॉक्साइड (PBO) के स्वदेशी विकल्प के रूप में विकसित किए गए हैं।
फोरेट के नियंत्रित विमोचन (Controlled release) फॉर्मुलेशन पॉलिस्टाइरीन, पॉलीविनाइल क्लोराइड, पॉलीमेथाइल मेथाक्रिलेट, पॉलीएथिलीन ग्लाइकोल, सेल्यूलोज एसीटेट, एथिल सेल्यूलोज एवं स्टार्च ज़ैंथेट में मोनोलिथिक डिस्पर्शन द्वारा विकसित किए गए हैं। ये फॉर्मुलेशन थाइमेट 10G की तुलना में आधी से एक-चौथाई मात्रा में समान कीट नियंत्रण प्रदान करते हैं।
Rabdosea melissoides पर आधारित मच्छर लार्वीसाइडल तैयारियों की तकनीक विकसित की गई है। इसके आवश्यक तेल तथा फिनोलिक/गैर-फिनोलिक घटक प्रभावी मच्छरनाशी उत्पाद के रूप में विकसित किए गए हैं।
नवीन कीटनाशी यौगिक—ऑक्साइम एस्टर, अल्केन डाइऑल/पॉलीऑल मोनो/डाइ/पॉली अल्कानोएट्स, 4-मेथाइल-6-पेंटाइल-α-पाइरोन्स—विकसित किए गए हैं। ये विशेष रूप से नेमाटिसाइड ( Meloidogyne incognita, Rotylenchulus reniformis ) तथा फंगीसाइड ( Rhizoctonia solani, Sclerotium rolfsii ) के रूप में प्रभावी हैं।
थायोफेनेट-मेथाइल एवं मैनकोज़ेब जैसे पारंपरिक कीटनाशियों के लिए लागत-प्रभावी स्वदेशी तकनीक विकसित कर एनआरडीसी को व्यावसायीकरण हेतु हस्तांतरित की गई है।
(कीट विज्ञान)
गोभी वर्गीय फसलों में कीट प्रबंधन
भिंडी में कीट प्रबंधन
बैंगन में कीट प्रबंधन
टमाटर में कीट प्रबंधन
ककड़ीवर्गीय फसलों में कीट प्रबंधन
सोयाबीन में कीट नियंत्रण
सरसों में कीट नियंत्रण
दलहनी फसलों के कीटों का प्रबंधन
कपास में कीट नियंत्रण
भंडारित अनाजों में कीट प्रबंधन
धान में कीट प्रबंधन
सूत्रकृमि विज्ञान
Steinernema thermophilum (स्वदेशी, ऊष्मा-सहिष्णु एंटोमोपैथोजेनिक सूत्रकृमि) पर आधारित नवीन जैव-कीटनाशी फॉर्मुलेशन विकसित किया गया है, जिसमें सूत्रकृमियों को जल-अघुलनशील सुपरएब्ज़ॉर्बेंट हाइड्रोजेल में समाविष्ट किया गया है। इसकी शेल्फ-लाइफ 5–50°C पर कुछ घंटों से 36 माह तक है और यह सूक्ष्मजीवों से संक्रमित नहीं होता।
पर्णीय कीटों के विरुद्ध सूत्रकृमियों के उपयोग की एप्लिकेशन तकनीक: Steinernema thermophilum के 2000 संक्रामक किशोर/मि.ली. स्प्रे से पत्तागोभी में डायमंड बैकमोथ, कपास में स्पोडोप्टेरा तथा बैंगन/तंबाकू में सफेद मक्खी का नियंत्रण।
Photorhabdus luminescens आधारित कीट नियंत्रण फॉर्मुलेशन।
Heterorhabditis indica (भा. कृ. अनु. सं. स्ट्रेन) को सोडियम एल्जिनेट बीड्स में कीट-फागोस्टिमुलेंट के साथ समाहित किया गया है। 48 घंटे में Spodoptera, Helicoverpa, Holotrichia की उच्च मृत्यु दर; शेल्फ-लाइफ 6–8 माह।
नीम बीज उपचार द्वारा सूत्रकृमि प्रबंधन।
गेहूँ में ईयर-कॉकल एवं टुंडू रोग का नियंत्रण।
पादप रोग विज्ञान
साइट्रस में ग्राफ्ट-संचरित रोगजनकों हेतु निदान किट विकसित की गई है। इसमें आर एन ए (RNA) एवं डी एन ए (DNA) दोनों रोगजनकों के लिए एकीकृत न्यूक्लिक एसिड टेम्पलेट तैयारी तथा समान पी सी आर (PCR) परिस्थितियाँ शामिल हैं, जिससे लागत, समय और ऊर्जा की बचत होती है। यह किट भारत में साइट्रस को प्रभावित करने वाले विषाणुओं एवं ग्रीनिंग बैक्टीरिया की जानकारी भी प्रदान करती है।
फसल वृद्धि प्रोत्साहन एवं रोग प्रबंधन हेतु जैव-नियंत्रण तकनीक: एकीकृत कीट प्रबंधन एवं जैविक खेती का महत्वपूर्ण घटक। एस्परगिलस निगर, ट्राइकोडर्मा हार्ज़ियनम तथा ट्राइकोडर्मा वाइराइड जैसे कवकीय जैव-एजेंट्स से जैव-फॉर्मुलेशन विकसित किए गए हैं।

भा.कृ.अनु.प –भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान


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