
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 28 जून, 2015 को झारखंड के हजारीबाग जिले के बरही में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान–झारखंड (भा.कृ.अ.प. - भा. कृ. अनु. सं., झारखंड) की आधारशिला का अनावरण किया। अपने प्रेरक संबोधन में श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि कृषि क्षेत्र में अनुसंधान अत्यंत आवश्यक है और यह केवल एक ही स्थान पर संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कृषि में क्रांति पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम—अर्थात भारत के पूर्वी हिस्से—में ही संभव है। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और लगातार खंडित होती जोतों के बीच देश के लिए समय की मांग है कि बिना किसी विलंब के दूसरी हरित क्रांति लाई जाए, जो केवल पूर्वी भारत में ही संभव है । प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सभी कृषि-जलवायु क्षेत्रों में समुचित अनुसंधान की आवश्यकता है। इससे न केवल सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित होंगे, बल्कि किसानों के बीच इसकी स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के विस्तार की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पशुपालन और मत्स्य पालन कृषि क्षेत्र के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं तथा दुग्ध क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के महत्व पर विशेष जोर दिया । भा. कृ. अनु. सं –झारखंड की स्थापना ग्राम गोरिया कर्मा में 1000 एकड़ भूमि में फैले विशाल परिसर में की जा रही है। इसका मिशन एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) दृष्टिकोण और बहु-विषयक अनुसंधान के माध्यम से समावेशी कृषि विकास को प्राप्त करना है। यह संस्थान देश-विदेश से स्नातकोत्तर एवं डॉक्टोरल स्तर के उत्कृष्ट विद्यार्थियों को क्षेत्र-विशिष्ट अनुसंधान हेतु आकर्षित करेगा। प्रमुख क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान अनुसंधान के प्राथमिकता-आधारित क्षेत्रों के माध्यम से किया जाएगा, जिन्हें स्नातकोत्तर शिक्षा एवं विस्तार कार्यक्रमों के साथ एकीकृत किया जाएगा। यह संस्थान उत्पादक, लाभकारी एवं सतत कृषि के लिए सदाबहार क्रांति (एवरग्रीन रिवोल्यूशन) का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे पूर्वी क्षेत्र में समग्र समृद्धि सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही, यह ग्रामीण रोजगार एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु सहायक उद्योगों के विकास में भी योगदान देगा।