भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान | ICAR-Indian Agricultural Research Institute

कृषि मौसम सलाहकार

मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in


साल-32, क्रमांक:-79/2025-26/मंग.                                                                                                                                                     समय: अपराह्न 2.30 बजे                                                                            दिनांक: 30-12-2025

बीते सप्ताह का मौसम (24 से 30 दिसम्बर, 2025)

सप्ताह केदौरान सुबह के समय आंशिक रूप से धुंध/हल्का कोहरा रहा। दिन का अधिकतम तापमान 19.8 से 22.8 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 19.6 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 4.2 से 10.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 5.3 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 97 से 100 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 38 से 66 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 5.4 घंटे प्रतिदिन (साप्ताहिक सामान्य 3.3 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 2.7 कि.मी प्रतिघंटा (साप्ताहिक सामान्य 2.5 कि.मी प्रतिघंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 1.6 मि.मी (साप्ताहिक सामान्य 2.2 मि.मी) प्रतिदिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।


भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान
मौसमी तत्व/दिनांक 2025-12-312026-01-012026-01-022026-01-032026-01-04
वर्षा (मि.मी.) 0.01.00.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}2219191818
न्यूनतम तापमान {°सेल्सियस}0811110908
बादलों की स्थिति (ओक्टा)44422
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम100100100100100
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम7075757070
हवा की गति (कि.मी/घंटा)1010101015
हवा की दिशाउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिम
साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)
1.0
विशेष मौसम
हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना है। सुबह के समय हल्का से मध्यम स्तर का कोहरा छा सकता है।

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 04 जनवरी, 2026 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  • देर से बोयी गई गेहूँ की फसल यदि 21-25 दिन की हो गयी तो पहली सिंचाई आवश्कयतानुसार करें तथा 3-4 दिन के बाद नत्रजन की शेष मात्रा का छिड़काव करें।
  • गेहूँ की फसल में यदि दीमक का प्रकोप दिखाई दे, तो बचाव हेतु किसान क्लोरपायरीफाँस 20 ई.सी. @ 2.0 ली. प्रति एकड़ 20 कि.ग्रा. बालू में मिलाकर खेत में शाम को छिड़क दे, और सिंचाई करें। 
  • देर से बोई गई सरसों की फसल में विरलीकरण तथा खरपतवार नियंत्रण का कार्य करें। मौसम को मध्यनजर रखते हुए सरसों की फसल में सफ़ेद रतुआ रोग एवं चेपा कीट की नियमित रूप से निगरानी करें। 
  • चने की फसल में फली छेदक कीट के निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ उन खेतों में लगाएं जहां पौधों में 10-15% फूल खिल गये हों। “T” अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए। 
  • गोभीवर्गीय फसल में हीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक तथा टमाटर में फल छेदक की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड खेतों में लगाएं। 
  • इस मौसम में तैयार बन्दगोभी, फूलगोभी, गांठगोभी आदि की रोपाई मेड़ों पर कर सकते हैं। 
  • इस मौसम में पालक, धनिया, मेथी की बुवाई कर सकते हैं। पत्तों के बढ़वार के लिए 20 कि.ग्रा. यूरिया प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं। 
  • इस मौसम में आलू तथा टमाटर में झूलसा रोग की निरंतर निगरानी करते रहें। लक्षण दिखाई देने पर कार्बंडिजम 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी या डाईथेन-एम-45 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें।
  • इस मौसम में प्याज की समय से बोयी गई फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। प्याज में परपल ब्लोस रोग की निगरानी करते रहें। रोग के लक्षण पाये जाने पर डाएथेन- एम-45 @ 3 ग्रा. /ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि(1 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें। 
  • मटर की फसल पर 2 % यूरिया के घोल का छिड़काव करें। जिससे मटर की फल्लियों की सख्याँ में बढोतरी होती है।
  • कद्दूवर्गीय सब्जियों के अगेती फसल के पौध तैयार करने के लिए बीजों को छोटी पालीथीन के थेलों में भर कर पाली घरों में रखें। 

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सुभाष नटराज (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. प्र. कृष्णन (प्राध्यापक, कृषि भौतिकी संभाग)     

डा. देब कुमार दास (प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (परियोजना समन्वयक, मधुमक्खी पर अखिल भारतीय समन्वित परियोजना)

डा. दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा. ए. के. सिंह (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा. गोगराज सिंह जाट (वरिष्ठ वैज्ञानिक, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा. बिष्णु माया (वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)


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