भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान | ICAR-Indian Agricultural Research Institute

कृषि मौसम सलाहकार

मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in


साल-32, क्रमांक:-103/2025-26/मंग.                                                                                                                                           समय: अपराह्न 2.30 बजे                                                                   दिनांक: 24-03-2026

बीते सप्ताह का मौसम (18 मार्च से 24 मार्च, 2026)

सप्ताह के दौरान आसमान में बदल छाए रहे। 19 मार्च को 9.9 मिमीवर्षा, 20 मार्च को 6.5 मिमी वर्षा तथा 21 मार्च, को 2.8 मिमी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 21.4 से 32.9 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 31.2 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 12.6 से 16.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 15.2 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 70 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 36 से 83 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 4.7 घंटे प्रतिदिन (साप्ताहिक सामान्य 7.9 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 4.1 कि.मी प्रतिघंटा (साप्ताहिक सामान्य 4.6 कि.मी प्रतिघंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.0 मि.मी (साप्ताहिक सामान्य 5.4 मि.मी) प्रतिदिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।    


भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान
मौसमी तत्व/दिनांक 2026-03-252026-03-262026-03-272026-03-282026-03-29
वर्षा (मि.मी.) 0.02.02.00.04.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}3233323333
न्यूनतम तापमान {°सेल्सियस}1718181819
बादलों की स्थिति (ओक्टा)47447
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम90959590100
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम4550505055
हवा की गति (कि.मी/घंटा)1010050515
हवा की दिशाउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमपूर्व-उत्तर-पूर्वदक्षिण-दक्षिण-पूर्व
साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)
8.0
विशेष मौसम
आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। दोपहर के दौरान हल्की बारिश/बूंदाबांदी के साथ गरज/बिजली और तेज हवाएं चलने की संभावना है, हवा की गति 20-30 किमी प्रति घंटा से बढ़कर 40 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है।

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 29 मार्च, 2026 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  • बीते दिनों तथा आने वाले दिनों मे हल्की वर्षा को ध्यान में रखते हुए सभी किसानों को सलाह है की किसी प्रकार का छिड़काव ना करें तथा खड़ी फसलों व सब्जियों में उचित प्रबंधन रखे।
  • किसान कटी हुई फसलों को बाँधकर तथा ढककर रखे अन्यथा तेज हवा या आंधी से फसल एक खेत से दूसरे खेत में जा सकती है और वर्षा से खराब हो सकती हैं। 
  • पूर्ण रूप से पके तोरिया या सरसों की फसल को अतिशीघ्र काट दें। 75-80 प्रतिशत फली का रंग भूरा होना ही फसल पकने के लक्षण हैं। फलियों के अधिक पकने की स्थिति में दाने झड़ने की संभावना होती है। अधिक समय तक कटे फसलों को सुखने के लिए खेत पर रखने से चितकबरा बग से नुकसान होता है अतः वे जल्द से जल्द गहाई करें। गहाई के बाद फसल अवशेषों को नष्ट कर दें, इससे कीट की संख्या को कम करने में मदद मिलती है।
  • इस मौसम में मूंग और उड़द की फसलों की मार्च में बुवाई हेतु किसान किसी प्रमाणित स्रोत से उन्नत बीजों का संग्रह करें। मूंग– पूसा विशाल, पूसा बैसाखी, पी.डी एम-11, एस एम एल-32; उड़द– पंत उड़द-19, पंत उड़द-30, पंत उड़द-35, पी डी यू-1। बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचार करें।
  • फ्रेंच बीन (पूसा पार्वती, कोंटेनडर), सब्जी लोबिया (पूसा कोमल, पूसा सुकोमल), चौलाई (पूसा किरण, पूसा लाल चौलाई), भिंण्डी (ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका आदि), लौकी (पूसा नवीन, पूसा संदेश), खीरा (पूसा उदय), तुरई (पूसा स्नेह) आदि तथा गर्मी के मौसम वाली मूली (पूसा चेतकी) की सीधी बुवाई हेतु वर्तमान तापमान अनुकूल है क्योंकि, बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं। उन्नत किस्म के बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से लेकर बुवाई करें। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।
  • मौसम को ध्यान में रखते हुए किसान टमाटर, मिर्च, कद्दूवर्गीय सब्जियों के तैयार पौधों की रोपाई इस सप्ताह कर सकते हैं।
  • इस मौसम में प्याज की समय से बोयी गई फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। कीट के पाये जाने पर इमिडाक्लोप्रिड़ @ 0.5 मिली./ 3 ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि (1.0 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें।
  • मौसम को ध्यान में रखते हुए टमाटर के फलों को फली छेदक कीट से बचाव हेतु किसान खेत में पक्षी बसेरा लगाए। वे कीट से नष्ट फलों को इकट्ठा कर जमीन में दबा दें। साथ ही फल छेदक कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 4-5 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं।
  • इस मौसम में बैंगन की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1.0 मि.ली. / 4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
  • इस तापमान में मक्का चारे के लिए (प्रजाति– अफरीकन टाल) तथा लोबिया की बुवाई की जा सकती है। बेबी कार्न की एच एम-4 की भी बुवाई कर सकते हैं। 
  • आम तथा नींबू में पुष्पन के दौरान सिंचाई ना करें तथा मिलीबग व होपर कीट की निगरानी करते रहें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सुभाष नटराज (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. प्र. कृष्णन (प्राध्यापक, कृषि भौतिकी संभाग)     

डा. देब कुमार दास (प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (परियोजना समन्वयक, मधुमक्खी पर अखिल भारतीय समन्वित परियोजना)

डा. दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा. ए. के. सिंह (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा. गोगराज सिंह जाट (वरिष्ठ वैज्ञानिक, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा. बिष्णु माया (वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)


ICAR-IARI Scientists