भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान | ICAR-Indian Agricultural Research Institute

कृषि मौसम सलाहकार

मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in


साल-33, क्रमांक:-27/2026-27/शुक्र.                                                                                                                                   समय: अपराह्न 2.30 बजे                                                                                दिनांक: 03-07-2026

बीते सप्ताह का मौसम (27 जून से 03 जुलाई, 2026)

सप्ताह के दौरान आसमान में बादल छाये रहें। 01 जुलाई को 3.1 मिमी वर्षा तथा 02 जुलाई, को 1.1 मिमी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 32.7 से 42.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 36.8 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 23.3 से 31.9 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 27.0 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 66 से 93 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 41 से 70 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 5.2 घंटे प्रतिदिन (साप्ताहिक सामान्य 5.0 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 5.6 कि.मी प्रतिघंटा (साप्ताहिक सामान्य 5.5 कि.मी प्रतिघंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 8.5 मि.मी (साप्ताहिक सामान्य 6.9 मि.मी) प्रतिदिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।


भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान
मौसमी तत्व/दिनांक 2026-07-042026-07-052026-07-062026-07-072026-07-08
वर्षा (मि.मी.) 2.05.02.04.013.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}3533323131
न्यूनतम तापमान {°सेल्सियस}2728272625
बादलों की स्थिति (ओक्टा)67777
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम9090959595
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम5055606060
हवा की गति (कि.मी/घंटा)2015152015
हवा की दिशापूर्वपूर्वदक्षिण-दक्षिण-पूर्व दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दक्षिण-दक्षिण-पूर्व
साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)
26.0
विशेष मौसम
आसमान में बादल छाए रहेंगे। कुछ जगहों पर बहुत हल्की बारिश हो सकती है, साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। तेज़ हवाएँ चल सकती हैं जिनकी गति 30-40 किमी/घंटा तक हो सकती हैं।

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 08 जुलाई, 2026 तक के लिए     

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  • धान की नर्सरी यदि 20-25 दिन की हो गई हो तो तैयार खेतों में धान की रोपाई शुरू करें| पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेमी रखें। उर्वरकों में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट/हैक्टर की दर से डाले, तथा नील हरित शैवाल एक पेकेट/एकड़ का प्रयोग उन्ही खेतो में करें जहाँ पानी खड़ा रहता हो, ताकि मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढाई जा सकें
  • जिन किसानों की धान की पौधशाला लग गयी हो वे बकानी रोग के लिए पौधशाला की निगरानी करते रहें तथा लक्षण पाये जाने पर कार्बेन्डिजम 2.0 ग्राम/लीटर पानी घोल कर छिडकाव करें।
  • धान की पौधशाला मे यदि पौधों का रंग पीला पड रहा है तो इसमे लौह तत्व की कमी हो सकती है। पौधों की ऊपरी पत्तियॉ यदि पीली और नीचे की हरी हो तो यह लौह तत्व की कमी दर्शाता है। इसके लिए 0.5 % फेरस सल्फेट + 0.25 % चूने के घोल का छिडकाव करें।
  • इस मौसम में किसान मक्का फसल की बुवाई करें। संकर किस्में: ए एच-421,ए एच-58 तथा उन्नत किस्में: पूसा कम्पोजिट-3,पूसा कम्पोजिट-4 बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।बीज की मात्रा 20 किलोग्राम/हैक्टर रखें। पंक्ति-पंक्ति की दूरी 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 से.मी. रखें। मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम/हैक्टर 800 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव आसमान साफ़ होने पर करें।
  • यह समय चारे के लिए ज्वार की बुवाई के लिए उप्युक्त हैं अतः किसान पूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। बीज की मात्रा 40 किलोग्राम/हैक्टर रखें तथा लोबिया की बुवाई का भी यह उप्युक्त समय है।
  • यह समय मिर्च, बैंगन व फूलगोभी (सितम्बर में तैयार होने वाली किस्में) की पौधशाला बनाने के लिए उपयुक्त है। किसान पौधशाला में कीट अवरोधी नाईलोन की जाली का प्रयोग करें, ताकि रोग फैलाने वाले कीटों से फसल को बचा सकें। पौधशाला को तेज धूप से बचाने के लिए छायादार नेट द्वारा 6.5 फीट की ऊँचाई पर ढक सकते है। बीजों को केप्टान (2.0 ग्राम/ कि.ग्रा बीज) के उपचार के बाद पौधशाला में बुवाई करें।
  • कद्दूवर्गीय सब्जियों की वर्षाकालीन फसल की बुवाई करें लौकी की उन्नत किस्में पूसा नवीन, पूसा समृद्वि करेला की पूसा विशेष, पूसा दो मौसमी, सीताफल की पूसा विश्वास, पूसा विकास तुरई की पूसा चिकनी धारीदार, तुरई की पूसा नसदार तथा खीरा की पूसा उदय, पूसा बरखा आदि किस्मों की बुवाई करें। 
  • मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। उसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मि.ली./लीटर की दर से छिड़काव आसमान साफ़ होने पर करें।
  • फलों के नऐ बाग लगाने वाले गड्डों में गोबर की खाद मिलाकर 5.0 मि.ली. क्लोरपाईरिफाँस एक लीटर पानी में मिलाकर गड्डों में ड़ालकर गड्डों को पानी से भर दे ताकि दीमक तथा सफेद लट से बचाव हो सके। पौधे किसी प्रमाणित स्रोत से खरीदकर रोपाई करें।
  • देशी खाद (सड़ी-गली गोबर की खाद, कम्पोस्ट) का अधिकाधिक प्रयोग करें ताकि भूमि की जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ सके। मृदा जाचँ के उपरांत उवर्रको की संतुलित मात्रा का उपयोग करें खासतौर पर पोटाश की मात्रा बढ़ाएं ताकि पानी की कमी के दौरान फसल की सूखे से लड़ने की क्षमता बढ़ सके। वर्षा आधारित एवं बारानी क्षेत्रों में भूमि मे नमी संचयन के लिए पलवार(मलचिंग) का प्रयोग करना लाभदायक होगा।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सुभाष नटराजा पिल्लै (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (परियोजना समन्वयक, मधुमक्खी पर अखिल भारतीय समन्वित परियोजना)

डा. दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा. ए. के. सिंह (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा. गोगराज सिंह जाट (वरिष्ठ वैज्ञानिक, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा. बिष्णु माया (वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)


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