भा.कृ.अ.प. - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान | ICAR-Indian Agricultural Research Institute

कृषि मौसम सलाहकार

मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in


साल-32, क्रमांक:-91/2025-26/मंग.                                                                                                                               समय: अपराह्न 2.30 बजे                                                                                                              दिनांक: 10-02-2026

बीते सप्ताह का मौसम (04 फरवरी से 10 फरवरी, 2026)

सप्ताह केदौरान सुबह के समय हल्का धुंध/कोहरा रहा। दिन का अधिकतम तापमान 21.8 से 25.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 22.1 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 6.5 से 9.1 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 7.9 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 93 से 100 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 44 से 78 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 7.4 घंटे प्रतिदिन (साप्ताहिक सामान्य 5.8 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 3.7 कि.मी प्रतिघंटा (साप्ताहिक सामान्य 3.7 कि.मी प्रतिघंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 2.3 मि.मी (साप्ताहिक सामान्य 2.7 मि.मी) प्रतिदिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।


भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान
मौसमी तत्व/दिनांक 2026-02-112026-02-122026-02-132026-02-142026-02-15
वर्षा (मि.मी.) 0.00.00.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}2524242525
न्यूनतम तापमान {°सेल्सियस}1110101012
बादलों की स्थिति (ओक्टा)34443
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम7875727875
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम7265657575
हवा की गति (कि.मी/घंटा)0510100505
हवा की दिशापूर्व-दक्षिण-पूर्व उत्तर-उत्तर-पूर्वउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिम
साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)
0.0
विशेष मौसम
आसमान मुख्यतः साफ रहेगा। सुबह के समय हल्की धुंध रहेगी।

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 15 फरवरी, 2026 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  • मौसम को ध्यान में रखते हुए गेहूँ की फसल में रोगों, विशेषकर रतुआ की निगरानी करते रहें। काला, भूरा अथवा पीला रतुआ आने पर फसल में प्रोपिकोनेजोल 25 EC (1.0 ml/लीटर पानी) का छिड़काव करें। पीला रतुआ के लिये 10-20 डिग्री सेल्सियस तापमान उप्युक्त है। 25 डिग्री सेल्सियस तापमान से उपर रोग का फैलाव नहीं होता। भूरा रतुआ के लिये 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ नमी यूक्त जलवायु आवश्यक है। काला रतुआ के लिये 20 डिग्री सेल्सियस से उपर तापमान ओर नमी रहित जलवायु आवश्यक है। 
  • चने की फसल में फली छेदक कीट की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ उन खेतों में लगाएं जहां पौधों में 40-45% फूल खिल गये हों। “T” अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए। 
  • इस सप्ताह तापमान को देखते हुए किसानों को सलाह है कि भिंडी की अगेती बुवाई हेतु ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका आदि किस्मों की बुवाई हेतु खेतों को पलेवा कर देसी खाद डालकर तैयार करें। बीज की मात्रा 10-15 कि.ग्रा./एकड़।
  • रबी फसलों एवं सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है क्योंकि यह परांगण में सहायता करती है अत: जितना संभव हो मघुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दें तथा दवाईयों का छिडकाव सर्दी के मौसम में सुबह या शाम के समय ही करें।
  • तापमान को मध्यनजर रखते हुए किसानों को सलाह है कि कद्दूवर्गीय सब्जियों, मिर्च, टमाटर, बेंगन आदि की बुवाई पौधाशाला में कर सकते है तथा तैयार टमाटर, मिर्च, कद्दूवर्गीय सब्जियों की पौधों की रोपाई कर सकते है। बीजों की व्यवस्था किसी प्रमाणिक स्रोत से करें। 
  • मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि आलू में पछेता झूलसा रोग की निरंतर निगरानी करते रहें तथा प्रारम्भिक लक्षण दिखाई देने पर मेन्कोजेब अथवा जिनेब 0.2 % का छिडकाव करें।
  • किसान एकल कटाई हेतु पालक (ज्योति), धनिया (पंत हरितमा), मेथी (पी.ई.बी, एच एम-1) की बुवाई कर सकते हैं। पत्तों के बढ़वार के लिए 20 कि.ग्रा. यूरिया प्रति एकड की दर से छिड़काव कर सकते हैं। 
  • गोभीवर्गीय फसल में हीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक तथा टमाटर में फल छेदक की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड खेतों में लगाएं। 
  • मौसम को ध्यान में रखते हुए गाजर, मूली, चुकन्दर और शलगम की फसल की निराई-गुड़ाई करे तथा चेपा कीट की निगरानी करें। 
  • मटर की फसल में फली छेदक कीट तथा टमाटर की फसल में फल छेदक कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड की दर से लगाए। यदि कीट अधिक हो तो बी.टी नियमन का छिड़काव करें।
  • इस मौसम में गेंदे में पूष्प सड़न रोग के आक्रमण की सम्भावना बढ जाती है अत: किसान फसल की निगरानी करते रहें। यदि लक्षण दिखाई दें तो कार्बंडीजम 50 % WP @ 1 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें।
  • इस मौसम में मिली बग के बच्चे जमीन से निकलकर आम के तनों पर चढ़ेगें, इसको रोकने हेतु किसान जमीन से 0.5 मीटर की ऊंचाई पर आम के तने के चारों तरफ 25 से 30 से.मी. चौड़ी अल्काथीन की पट्टी लपेटे। तने के आस-पास की मिट्टी की खुदाई करें जिससे उनके अंडे नष्ट हो जायेंगे।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सुभाष नटराज (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. प्र. कृष्णन (प्राध्यापक, कृषि भौतिकी संभाग)     

डा. देब कुमार दास (प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (परियोजना समन्वयक, मधुमक्खी पर अखिल भारतीय समन्वित परियोजना)

डा. दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा. ए. के. सिंह (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा. गोगराज सिंह जाट (वरिष्ठ वैज्ञानिक, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा. बिष्णु माया (वरिष्ठ वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)


ICAR-IARI Scientists