मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

             (दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in         

साल-28, क्रमांक:-50/2021-22/मंग.        समय: अपराह्न  2.30 बजे          दिनांक: 21-09-2021

बीते सप्ताह का मौसम (15 से 21 सितम्बर, 2021)

    सप्ताह के दौरान आसमान में बादल रहे। 17 सितम्बर को 17.8 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 29.2 से 36.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 34.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 23.2 से 26.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 24.5 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 84 से 90 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 67 से 79 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 5.7 घंटे प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 9.0 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 3.7 कि.मी. प्रति घंटा साप्ताहिक सामान्य 5.3 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.0 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.8 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्नभिन्न दिशाओं से रही।

मौसमी तत्व/दिनांक            

22-09-21

23-09-21

24-09-21

25-09-21

26-09-21

वर्षा (मि.मी.)

50.0

2.0

3.0

2.0

2.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

33

32

31

31

31

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

26

26

26

25

25

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

5

5

5

5

5

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

90

90

90

80

80

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

60

60

60

60

60

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

16

16

14

08

14

हवा की दिशा

 दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

 पूर्व-दक्षिण-पूर्व 

पूर्व

पूर्व-दक्षिण-पूर्व 

 दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                         59.0

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 26 सितम्बर, 2021 तक के लिए कृषि परामर्श सेवाओं,

कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  • कोरोना (कोविड़-19) के गंभीर फैलाव को देखते हुए किसानों को सलाह है कि तैयार सब्जियों की तुड़ाई तथा अन्य कृषि कार्यों के दौरान भारत सरकार द्वारा दिये गये दिशा निर्देशों, व्यक्तिगत स्वच्छता, मास्क का उपयोग, साबुन से उचित अंतराल पर हाथ धोना तथा एक दूसरे से सामाजिक दूरी बनाये रखने पर विशेष ध्यान दें
  • अगेती रबी फसलों की तैयारी के लिए खेत की जुताई करने के तुरंत बाद पाटा अवश्य लगाएं ताकि मिट्टी से नमी का ह्रास न हो।
  • आने वाले दिनों में वर्षा की सम्भावना को देखेते हुये सभी सब्जियों, दलहनी फ़सलों, मक्का तथा पौधशाला में जल निकास का उचित प्रबंन्ध करें। साथ ही सभी फसलों में किसी भी प्रकार का छिडकाव ना करें।
  • इस मौसम में अगेती मटर की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत किस्में- पूसा प्रगति, पूसा श्री, बीजों को कवकनाशी केप्टान या थायरम @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से मिलाकर उपचार करें उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगायें। गुड़ को पानी में उबालकर ठंडा कर ले और राईजोबियम को बीज के साथ मिलाकर उपचारित करके सूखने के लिए किसी छायेदार स्थान में रख दे तथा अगले दिन बुवाई करें।
  • सरसों की अगेती बुवाई के लिए पूसा सरसों-25, पूसा सरसों-26, पूसा सरसों 28, पूसा अगर्णी, पूसा तारक, पूसा महक आदि के बीज की व्यवस्था करें तथा बुवाई करें।
  • इस मौसम में किसान गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में- पूसा रूधिरा। बीज दर 4.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें तथा खेत में देसी खाद, पोटाश और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें। गाजर की बुवाई मशीन द्वारा करने से बीज 1.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है जिससे बीज की बचत तथा उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।
  • इस मौसम में फसलों व सब्जियों में दीमक का प्रकोप होने की संभावना रहती है अतः किसान फसलों की निगरानी करें यदि प्रकोप दिखाई दे तो क्लोरपाइरीफाँस 20 ई सी @ 4.0 मि.ली/लीटर सिंचाई जल के साथ देवें।
  • इस मौसम में किसान अपने खेतों की नियमित निगरानी करें। यदि फसलों व सब्जियों में सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।
  • इस मौसम में किसान धान के ब्लास्ट (बदरा) रोग का आक्रमण होने की निगरानी हर 2 से 3 दिन के अंतराल पर करें। इस रोग का सूचक है पत्तियों में एक छोटी आँख जैसा धब्बा जिसका अंदर का भाग हल्का भूरा और बाहर गहरे भूरे रंग का होता है। आगे जाकर अनेक धब्बे मिलकर एक बड़ा धब्बा बन जाता है।
  • इस मौसम में धान (पूसा सुगन्ध-2511) में आभासी कंड (False Smut) आने की काफी संभावना है। इस बीमारी के आने से धान के दाने आकार में फूल जाते है। इसकी रोकथाम के लिए ब्लाइटोक्स 50 की 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से आवश्यकतानुसार पानी में मिलाकर 10 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करें।
  • इस मौसम में धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट होपर का आक्रमण आरंभ हो सकता है अतः किसान खेत के अंदर जाकर पौध के निचली भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें। यदि कीट का प्रकोप अधिक है तो इमिडाक्लोप्रिड़ @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  • इस मौसम में धान की फसल में तना छेदक कीट की निगरानी के लिए फीरोमोन प्रपंच 4-6 प्रति एकड़ की दर से लगाए तथा प्रकोप अधिक हो तो करटाप दवाई 4% दानें 10 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।
  • इस मौसम में सब्जियों (मिर्च, बैंगन) में यदि फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी व पत्तागोभी में डायमंड़ बेक मोथ की निगरानी के लिए फीरोमोन प्रपंच 4-6 प्रति एकड़ की दर से लगाए तथा प्रकोप अधिक हो तो स्पेनोसेड़ दवाई 1.0 मि.ली./4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।
  • इस मौसम में सरसों साग- पूसा साग-1, मूली- समर लोंग, लोंग चेतकी; पालक- आल ग्रीन तथा धनिया- पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।
  • मिर्च तथा टमाटर के खेतों में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। यदि प्रकोप अधिक है तो इमिडाक्लोप्रिड़ @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें ।
  • इस मौसम में कीटों की रोकथाम के लिए प्रकाश प्रपंच का भी इस्तेमाल कर सकते है।इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बरतन में पानी और थोडा कीटनाशी मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें इस प्रपंच से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक 

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.देब कुमार दास (प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.बी.एस.तोमर (संयुक्त निदेशक प्रसार (कार्यवाहक) एवं अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)