मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

             (दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in         

साल-28, क्रमांक:-04/2021-22/मंग.            समय: अपराह्न  2.30 बजे            दिनांक:13.04.2021

बीते सप्ताह का मौसम (07 से 13 अप्रैल, 2021)

    सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा। दिन का अधिकतम तापमान 35.2 से 39.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 34.8 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 15.5 से 21.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 18.0 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 62 से 83 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 21 से 27 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 9.0 घंटे प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 8.8 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 4.3 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक सामान्य 5.1 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 6.2 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 7.9 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक            

14-04-21

15-04-21

16-04-21

17-04-21

18-04-21

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

2.0

1.0

0.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

40

40

38

36

37

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

20

20

21

20

19

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

3

3

3

3

2

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

60

65

70

75

70

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

20

22

25

30

25

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

18

18

15

15

15

हवा की दिशा

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम

दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम

पश्चिम

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                         3.0

विशेष

16  अप्रैल  को  तेज हवा (30-40 किमी प्रति घंटा)  चलने की संभावना है।

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 18 अप्रैल, 2021 तक के लिए कृषि परामर्श सेवाओं,

कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  • कोरोना (कोविड़-19) के गंभीर फैलाव को देखते हुए किसानों को सलाह है कि तैयार फसलों की कटाई तथा अन्य कृषि कार्यों के दौरान भारत सरकार द्वारा दिये गये दिशा निर्देशों, व्यक्तिगत स्वच्छता, मास्क का उपयोग, साबुन से उचित अंतराल पर हाथ धोना तथा एक दूसरे से सामाजिक दूरी बनाये रखने पर विशेष ध्यान दें
  • अनाज को भंडारण में रखने से पहले भंडारघर की सफाई करें तथा अनाज को सुखा लें। दानों में नमी 12 प्रतिशत से ज्यादा नही होनी चाहिए। भंडारघर को अच्छे से साफ कर लें। छत या दीवारों पर यदि दरारें है तो इन्हे भरकर ठीक कर लें। बोरियों को 5 प्रतिशत नीम तेल के घोल से उपचारित करें। बोरियों को धूप में सुखाकर रखें। जिससे कीटों के अंडे तथा लार्वा तथा अन्य बीमारियाँ आदि नष्ट हो जावें। किसानो को सलाह है की कटी हुई फसलों तथा अनाजों को सुरक्षित स्थान पर रखे।
  • इस मौसम में तैयार गेहूँ की फसल की कटाई की सलाह है। किसान कटी हुई फसलों को बाँधकर रखे अन्यथा तेज हवा या आंधी से फसल एक खेत से दूसरे खेत में जा सकती है। गहाई के उपरांत भंडारण से पूर्व दानों को अच्छी तरह से सुखा दें।
  • इस समय मूंग के उन्नत बीजों (पूसा विशाल, पूसा 672, पूसा 9351, पंजाब 668 ) की बुवाई करें। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है। बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फाँस्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचार करें।
  • वर्तमान तापमान फ्रेंच बीन, सब्जी लोबिया, चौलई, भिंण्डी, लौकी, खीरा, तुरई आदि तथा गर्मी के मौसम वाली मूली की सीधी बुवाई हेतु अनुकूल है क्योंकि, बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है। उन्नत किस्म के बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से लेकर बुवाई करें।
  • रबी फसल यदि कट चुकी है तो उसमें हरी खाद के लिए खेत में पलेवा करें। हरी खाद के लिए ढ़ेचा, सनई अथवा लोबिया की बुवाई की जा सकती है। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।
  • ग्वार, मक्का, बाजरा, लोबिया आदि चारा फसलों की बुवाई इस सप्ताह कर सकते है। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है। बीजों को 3-4 से.मी. गहराई पर डाले और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 से.मी. रखें।
  • इस मौसम में बेलवाली सब्जियों और पछेती मटर में चूर्णिल आसिता रोग के प्रकोप की संभावना रहती है। यदि रोग के लक्षण अधिक दिखाई दे तो कार्बंन्डिज्म @ 1 ग्राम/लीटर पानी दर से छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।
  • इस मौसम में भिंडी की फसल में माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर इथेयाँन @ 1.5-2 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।
  • प्याज की फसल में इस अवस्था में उर्वरक न दे अन्यथा फसल की वनस्पति भाग की अधिक वृद्धि होगी और प्याज की गांठ की कम वृद्धि होगी।
  • बैंगन तथा टमाटर की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। साथ ही कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड़ कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।
  • रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दे ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडो के अण्डे तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक 

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.देब कुमार दास (प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.बी.एस.तोमर (संयुक्त निदेशक प्रसार (कार्यवाहक) एवं अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)