मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

                    भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

               (दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-23, क्रमांक :- 101/2016-17/मंग.   समय:     अपराह्न  2.30 बजे        दिनांक: 21-03-2017

बीते सप्ताह का मौसम (15 से 21 मार्च, 2017)

   सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा।दिन का अधिकतम तापमान 25.5 से 30.0 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 27.7 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 7.5 से 13.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 13.8 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 89 से 95 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 36 से 54 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 8.0 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 7.8 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 4.4 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 5.2 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 5.0 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 5.5 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को उत्तर-पश्चिमी दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

22-03-17

23-03-17

24-03-17

25-03-17

26-03-17

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

   0.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

33

34

31

31

   32

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

17

18

18

   18

18

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

4

4

0

0

0

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

80

85

80

80

75

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

30

35

30

30

25

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

15

08

15

18

16

हवाकीदिशा

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम




















साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
26 मार्च, 2017 तक के लिए

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  1. पूर्ण रूप से पके तोरिया या सरसों की फसल को अतिशीघ्र काट दें। 75-80 प्रतिशत फली का रंग भूरा होना ही फसल पकने के लक्षण हैं। फलियों के अधिक पकने की स्थिति में दाने झड़ने की संभावना होती है। अधिक समय तक कटे फसलों को सुखने के लिए खेत पर रखने से चितकबरा बग से नुकसान होता है अतः वे जल्द से जल्द गहाई करें। गहाई के बाद फसल अवशेषों को नष्ट कर दें, इससे कीट की संख्या को कम करने में मदद मिलती है।
  2. तापमान तथा हवा की गति को मध्यनजर रखते हुये गेहूँ की फसल जो दूधिया या दाने भरने की अवस्था में है उसमें हल्की सिंचाई करें। सिंचाई ऐसे समय पर करें जब हवा शांत हो अन्यथा पौधे गिरने की संभावना रहती है।
  3. मूंग की फसल की बुवाई हेतु किसान भाई उन्नत बीजों की बुवाई करें। मूंग पूसा विशाल, पूसा रत्ना, पूसा- 5931, पूसा बैसाखी, पी.डी एम-11, एस एम एल- 32, एस एम एल-668, सम्राट; बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचार करें। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।
  4. टमाटर,मटर,बैंगन व चनाफसलों में फलों/फल्लियों को फल छेदक/फली छेदक कीट से बचाव हेतु किसान खेत में पक्षी बसेरा लगाए। वे कीट से नष्ट फलों को इकट्ठा कर जमीन में दबा दें। साथ ही फल छेदक कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो बी.टी. 1 ग्राम/लीटर पानी की दर से छिड़काव करें फिर भी प्रकोप अधिक हो तो 15 दिन बाद स्पिनोसेड कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
  5. सब्जियों में चेपा के आक्रमण की निगरानी करते रहें। वर्तमान तापमान में यह कीट जल्द ही नष्ट हो जाते हैं। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो इमिडाक्लोप्रिड़ @ 0.25 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से पके फलों की तुड़ाई के बाद छिड़काव करें। सब्जियों की फसलों पर छिड़काव के बाद कम से कम एक सप्ताह तक तुड़ाई न करें। बीज वाली सब्जियों पर चेपा के आक्रमण पर विशेष ध्यान दें।
  6. इस मौसम में बेलवाली सब्जियों में लाल भृंग कीट के आक्रमण की संभावना रहती है, यदि कीट की संख्या अधिक हो तो ड़ाईक्लोरवाँस 76 ई.सी. (डी.डी.वी.पी.)@ 1 ग्राम/लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
  7. इस मौसम में बेलवाली सब्जियों और पछेती मटर में चूर्णिल आसिता रोग के प्रकोप की संभावना रहती है।  यदि रोग के लक्षण दिखाई दे तो कार्बंन्डिज्म @ 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
  8. बेलवाली सब्जियां जो 20 से 25 दिन की हो गई हो तो उनमें 10-15 ग्राम यूरिया प्रति पौध डालकर गुड़ाई करें।
  9. फ्रेंच बीन (पूसा पार्वती, कोंटेनडर), सब्जी लोबिया (पूसा कोमल,पूसा सुकोमल), चौलाई (पूसा किरण, पूसा लाल चौलाई), भिंण्डी (ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका आदि), लौकी (पूसा नवीन, पूसा संदेश), खीरा (पूसा उदय), तुरई (पूसा स्नेह) आदि तथा गर्मी के मौसम वाली मूली (पूसा चेतकी) की सीधी बुवाई हेतु वर्तमान तापमान अनुकूल है क्योंकि, बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं। उन्नत किस्म के बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से लेकर बुवाई करें। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।
  10. प्याज की फसल में हल्की सिंचाई करें। फसल की इस अवस्था में उर्वरक न दे अन्यथा फसल की वनस्पति भाग की अधिक वृद्धि होगी और प्याज की गांठ की कम वृद्धि होगी। 
  11. इस मौसम में समय से बोयी गई बीज वाली प्याज की फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। कीट के अधिक पाये जाने पर कार्बारिल @ 2 ग्रा. प्रति लीटर पानी की दर से किसी चिपचिपा पदार्थ (स्टीकाल, टीपाल आदि) के साथ मिलाकर छिड़काव करें। बीज फसल में परपल ब्लोस रोग की निगरानी करते रहें। रोग के लक्षण अधिक पाये जाने पर आवश्यकतानुसार डाईथेन एम-45 @ 3 ग्रा. प्रति लीटर पानी की दर से किसी चिपचिपा पदार्थ (स्टीकाल, टीपाल आदि) के साथ मिलाकर छिड़काव करें।
  12. इस तापमान में मक्का चारे के लिए (प्रजातिअफरीकन टाल) तथा लोबिया की बुवाई की जा सकती है। बेबी कार्न की एच एम-4 की भी बुवाई कर सकते हैं।
  13. आम तथा नींबू में पुष्पन के दौरान सिंचाई ना करें तथा मिलीबग व होपर कीट की निगरानी करते रहें।
  14. मौसम को ध्यान मे रखते हुए किसान भाईयों को सलाह है कि ग्रीष्मऋतु के लिये गेंदे की तैयार पौध की रोपाई करें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक  

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग