मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

                               कृषि भौतिकी संभाग                                    

            भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

      (दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-24, क्रमांक :- 31/2017-18/शुक्र.   समय अपराह्न  2.30 बजे        दिनांक:21-07-2017

बीते सप्ताह का मौसम (15 से 21 जुलाई, 2017)

                     सप्ताह के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल रहे।15 जुलाई को 2.2 मि.मी, 18 जुलाई को 5.2 मि.मी, 20 जुलाई को 12.6 मि.मी तथा 21 जुलाई को 3.6 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई।दिन का अधिकतम तापमान 32.0 से 37.2 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 34.1 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 23.2 से 27.9 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 26.8 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 79 से 96 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 54 से 91 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 5.1 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 6.1 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 4.7 कि.मी प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 6.8 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.8 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.6 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा पूर्व दिशा से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

22-07-17

23-07-17

24-07-17

25-07-17

26-07-17

वर्षा (मि.मी.)

  5.0

 6.0

 4.0

 6.0

   2.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

 33

 33

 35

   36

   36

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

 28

 26

 26

   26

 27

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

 7

 6

 7

 8

 5

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

 90

 95

 85

 85

 80

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

 60

 65

 65

 60

 55

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

 19

 20

 10

 14

   10

हवाकीदिशा

पूर्व

पूर्व    

दक्षिण- दक्षिण-पूर्व

   पूर्व- दक्षिण-पूर्व

   पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                                    23.0         




















साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
26 जुलाई, 2017 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   सभी 25 से 30 दिन की फसलों में खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई का कार्य करें। इससे खरपतवारों द्वारा फसलों को कम हानि होती है तथा जल की बचत होती है और जड़ों का विकास अच्छा होता है।

2.   धान की फसल यदि 20-25 दिन की हो गई हो तो नत्रजन उर्वरक 30- 40 किलोग्राम/हैक्टर की दर से खेत में डालें

3.   वर्तमान मौसम को ध्यान में रखते हूये इस सप्ताह मक्का की बुवाई मेड़ों पर करें। संकर किस्में ए एच-421 व ए एच-58 तथा उन्नत किस्में पूसा कम्पोजिट-3, पूसा कम्पोजिट-4 की बुवाई कर सकते है। बीज की मात्रा 20 किलोग्राम/हैक्टर रखें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 से.मी. रखें। मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम/ हैक्टर 800 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करें।

4.   मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि बाजरे (किस्में-संकर बाजरा पूसा-605, संकर बाजरा पूसा-415, संकुल बाजरा पूसा-383, एच.एस.वी-67) की बुवाई करें। बीज को उपचारित करना आवश्यक है विशेष रूप से अरगट रोग के रोकथाम के लिए 10 % नमक के घोल में बीजों को भिगो दें तथा ऊपर आये हुए खराब व हल्के बीजों को निकालकर फेंक दें । इसके उपरांत बीजों को थीरम या बावस्टिन दवाई 2.0 ग्राम/किलोग्राम की दर से उपचारित करे ताकि बीज जनित रोग से फसल को बचाया जा सके।

5.   इस मौसममें स्वीट कोर्न (माधुरी, विन ऑरेंज) तथा बेबी कोर्न (एच एम-4) की बुवाई मेड़ों पर करें

6.   यह समय चारे के लिए बाजरा, ज्वार, मक्का की बुवाई के लिए उप्युक्त हैं अतःकिसानभाई पूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें । बीज की मात्रा 40 किलोग्राम/हैक्टर रखें । लोबिया की बुवाई का भी यह उप्युक्त समय है।

7.इस मौसममें ग्वार (पूसा नव बहार, दुर्गा बहार), मूली (पूसा चेकी), लोबिया (पूसा सुकोमल), सेम (पूसा सेम 2, पूसा सेम 3), पालक (पूसा भारती), चौलाई (पूसा लाल चौलाई, पूसा किरण ) आदि फसलों की बुवाई के लिए खेत तैयार हो तो बुवाई मेड़ों पर करें। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।

8.इस समय मूली- पूसा चेतकी, वर्षा की रानी समर लोंग, लोंग चेतकी;; पालक- आल ग्रीन, भारती, तथा धनिया- पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई करें।

9.यदि हरी प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, बैंगन व अगेतीफूलगोभी की पौध तैयार है, तो मौसम को मध्यनजर रखते हुए रोपाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।

10.  कद्दूवर्गीय सब्जियोंजैसे लौकी (उन्नत किस्में पूसा नवीन, पूसा समृद्वि) करेला (पूसा विशेष, पूसा दो मौसमी), सीताफल (पूसा विश्वास, पूसा विकास), (तोरई की पूसा स्नेहा) किस्मों की बुवाई मेड़ों पर करें

11.  कद्दूवर्गीय सब्जियों को ऊपर चढाने की व्यवस्था करे ताकि वर्षा से सब्जियों की लताओं को गलने से बचाया जा सके।

12.  कद्दूवर्गीय एवं अन्य सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है क्योंकि, वे परांगण में सहायता करती है इसलिए जितना संभव हो मघुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दें। कीड़ों एवं बीमारियों की निरंतर निगरानी करते रहें, कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क रखें व सही जानकारी लेने के बाद ही दवाईयों का प्रयोग करें। फलमक्खी से प्रभावित फलों को तोड़कर गहरे गड्डे में दबा दें, फलमक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ मैलाथियान (10%) का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें  ताकि फलमक्खी का नियंत्रण हो सके।

13.  यदि कपास में रस चूसने वाले कीटों तथा मिली बग का प्रकोप दिखाई दे तो प्रभावित पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर दें | साथ ही कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं। यदि कीटों की सख्याँ अधिक हो तो बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड़ कीटनाशक 0.5 मि.ली./ली. पानी में मिलाकर छिड़काव मौसम साफ होने पर करें। कीटों की निगरानी तथा बचाव के लिए फेरोमोन ट्रेप का उपयोग कर सकते है।

14.  भिंडी, मिर्च तथा बेलवाली फसल में माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर इमिडाक्लोप्रिड़ 17.8 @ 0.5  मि.ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।

15.  गेदें के फूलों की (पूसा अर्पिता) वर्षाकालीन पौध छायादार जगह पर तैयार करें तथा जल निकास का उचित प्रबन्ध रखे।

16.  फलों के नऐ बाग लगाने का उचित समय है। गड्डों में किसी प्रमाणित स्रोत से पौधे खरीदकर रोपाई करें । ध्यान रखें कि गड्डों में वर्षा का ज्यादा पानी इकट्ठा न हो सके ।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक  

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग