मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

                             ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

                               कृषि भौतिकी संभाग                                    

    भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-24, क्रमांक :- 07/2017-18/मंग.   समय:     अपराह्न  2.30 बजे      दिनांक:25-04-2017

बीते सप्ताह का मौसम (19 से 25 अप्रैल, 2017)

                      सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा।दिन का अधिकतम तापमान 37.5 से 43.2 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 36.1 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 21.9 से 26.5 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 19.7 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 56 से 89 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 34 से 51 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 8.5 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 9.1 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 6.6 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 4.6 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 7.0 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 8.8 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

26-04-17

27-04-17

28-04-17

29-04-17

30-04-17

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

   0.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

38

39

39

40

   40

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

23

24

23

   24

25

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

5

2

4

5

2

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

55

50

55

55

50

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

25

30

25

30

25

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

10

15

15

10

08

हवाकीदिशा

पश्चिम-उत्तरपश्चिम       

पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

दक्षिण     

पूर्व-दक्षिण-पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                           0.0               


























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
30 अप्रेल, 2017 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   मौसम शुष्क रहने तथा तापमान को ध्यान में रखते हुए सभी सब्जियों तथा जायद फसलों में हल्की सिंचाई सुबह या शाम के समय करने की सलाह दी जाती है।

2.   भंडारण से पूर्व अनाज को अच्छी प्रकार से साफ करें और यह सुनिश्चित करें की दानों में 12% से कम नमी होंजिस भंडार में अनाज रखना हों उसे अच्छी प्रकार साफ करें।दीवारों के दरारों को बन्द करें तथा पूताई करें।जिन बोरों में अनाज रखना हो उन्हें धूप में सुखाएं, जिससे कीडों के अंडो तथा रोग के अंश नष्ट हों।भंडारण से पूर्व यह ध्यान रखें की दानों को सुबह ही बोरों में डालें अन्यथा गर्म दानों को रखने से रोग तथा कीडों के पनपने की संभावना बढ़ सकती है।किसान अनाज का भंडारण पूसा कोठार में कर सकते हैं।पूसा कोठार में भंडारण से यह लाभ है कि अनाज की जमाव शक्ति बरकरार रहती है।अनाज भंडारग्रह में सुबह के समय ही भरें।

3.   यह समय हरी मिर्च और बैंगन की पौध बनाने के लिए उपयुक्त है, अतः किसान भाई यह प्रयास करें कि वे कीट अवरोधी नाईलोन की जाली का प्रयोग करें ताकि रोग फैलाने वाले कीट से पौधो को बचा सकें। बुवाई के समय पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है।

4.   यह मौसम अगेती फूलगोभी की पौध तैयार करने के लिए उपयुक्त है।किसान भाईयों को यह सलाह है कि वे तैयार पौधशाला क्षैत्रो को कम मोटाई वाली प्लास्टिक (20-30  माइक्रोन) से ढककर सूर्य तापीकरण करें।इस प्रक्रिया से जमीन में रहने वाले रोगाणु, जो पौधें में रोग के कारण होते है वे नष्ट हो जाते है। बीजों को केप्टान या थीराम @ 2-2.5 ग्रा./कि.ग्रा. की दर से उपचार के बाद पौधशाला में बुवाई करें। बुवाई के समय पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है।

5.   अरहर की बुवाई के लिए खेत की तैयारी करें। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। किसान भाईयों को यह सलाह है कि वे बीजों को बोने से पहले अरहर के लिए उपयुक्त राईजोबियम तथा फास्फोरस में घुलनशील बेक्टीरिया से अवश्य उपचार कर लें इस उपचार से बीजो के अंकुरण तथा उत्पादन में वृद्धि होती है। अरहर की उन्नत किस्में:- पूसा- 2001, पूसा-  991,पूसा- 992, पारस मानक, UPAS 120.

6.   इस मौसम मेंबेलवाली सब्जियों में लाल भृंग कीट के आक्रमण की संभावना रहती है, यदि कीट की संख्या अधिक हो तो ड़ाईक्लोरवाँस (डी.डी.वी.पी.) 76 ई.सी.@ 1 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। मित्र कीटों के बचाव हेतु नाशक दवाईयों का छिड़काव कम से कम करें।

7.   भिंडी फसल में माईट कीट की निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर ईथियाँन @1.5-2 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इस मौसम में भिंडी की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।

8.   बैंगन तथा टमाटर की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें | साथ ही कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं।यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड़ कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।

9.   ग्वार, मक्का, बाजरा, लोबिया आदि चारा फसलों की बुवाई इस सप्ताह कर सकते हैं। बुवाई के पहले बीजों को 3-4 घंटों तक पानी में भिगोकर ही बुवाई करें। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है। बीजों को 3-4 से.मी. गहराई पर डाले और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 से.मी. रखें।

10.रबी फसल यदि कट चुकी है तो उसमें ग्रीष्मकालीन हरी खाद के लिए मूंग, ढ़ेचा, सनई अथवा लोबिया की बुवाई की जा सकती है परंतु बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।

11.रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें, ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडो के अण्ड़े तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।

12.इस मौसम में किसान अपनी मिट्टी की जांच किसी प्रमाणित स्रोत से करवाएं और जहाँ संभव हो अपने खेत को समतल करवाएं।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग