मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-23, क्रमांक :- 93/2016-17/मंग.   समय:     अपराह्न  2.30 बजे       दिनांक:21-02-2017

बीते सप्ताह का मौसम (15 से 21 फरवरी, 2017)

  सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा। दिन का अधिकतम तापमान 24.0 से 31.0 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 22.4 डिग्रीसेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 7.8 से 15.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 9.3 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 79 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 41से 85 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 6.6 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 6.3 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 4.4 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 4.1 कि.मी. प्रतिघंटा)तथावाष्पीकरणकीऔसतदर 4.2 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 3.0 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा अधिकतर शांत रही तथा अपराह्न को उत्तर-पश्चिमी दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक

22-02-17

23-02-17

24-02-17

25-02-17

26-02-17

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

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अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

29

28

28

30

  30

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

14

13

14

16

16

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

0

0

0

0

0

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

90

90

90

90

35

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

35

35

35

35

35

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

07

10

13

13

11

हवा की दिशा

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम


















साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
26 फरवरी, 2017 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.       इस सप्ताह तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए किसानों को सलाह है कि सभी फसलों तथा सब्जियों में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें।

2.    मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है किगेहूँ की फसल में रोगों, विशेषकर रतुआ की निगरानी करते रहें। काला, भूरा अथवा पीला रतुआ आने पर फसल में डाइथेन एम-45 (2.5 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव करें। पीला रतुआ के लिये 10-20 डिग्री सेल्सियस तापमान उप्युक्त है। 25 डिग्री सेल्सियस तापमान से उपर रोग काफैलाव नहीं होता। भूरा रतुआ के लिये 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ नमी यूक्त जलवायु आवश्यक है। काला रतुआ के लिये 20 डिग्री सेल्सियस से उपर तापमान ओर नमी रहित जलवायु आवश्यक है।

3.   इस सप्ताह खाली खेतों में बसंतकालीन गन्ने की रोपाई करें। उन्नत किस्में-करनाल-1, करनाल-2, करनाल-3, करनाल-4, करनाल-5, करनाल-6 आदि की बुवाई करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 90 से. मी. रखें। कतारों की खाली जगह में लोबिया, ग्वार, पालक ,चौलाई आदि सब्जी फसलों को सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।

4.     इस सप्ताह तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए किसानों को सलाह है कि भिंडी की अगेती बुवाई हेतु ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका आदि किस्मों की बुवाई करें बुवाई से पूर्व बीजों को केप्टान या थीरम 2.0 ग्राम/कि.ग्रा. बीज व जीवाणु खाद एक पैकट/एकड़ के बीज में मिलाकर अवश्य उपचारित करें। बुवाई से पूर्व खेतों में पर्याप्त नमी का ध्यान रखें। बीज की मात्रा 10-15 कि.ग्रा./एकड़।

5.     वर्तमान शुष्क तथा बढते तापमान को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि सभी सब्जियों तथा सरसों की पछेती फसल में चेपा कीट के आक्रमण की निगरानी करें।

6.     फ्रेंच बीन, गर्मी के मौसम वाली मूली इत्यादि की सीधी बुवाई हेतु वर्तमान तापमान अनुकूल है क्योंकि बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं। किसानों को सलाह है कि उन्नत बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से ही प्राप्त करें।

7.     मूंग और उड़द की फसलों की बुवाई हेतु किसानों को सलाह है कि किसी प्रमाणित स्रोत से उन्नत बीजों का संग्रह करें। मूंग पूसा विशाल, पूसा रत्ना, पूसा- 5931, पूसा बैसाखी, पी.डी एम-11, एस एम एल- 32, एस एम एल-668,सम्राट; उड़द पंत उड़द- 19, पंत उड़द- 30, पंत उड़द- 35, पी डी यू-1। बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबियम तथा फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचार करें। जिन किसानों के खेत खाली है तो खेत तैयार कर के बुवाई शुरू करें

8.    मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि, टमाटर, मिर्च आदि सब्जियों की तैयार पौध की रोपाई कर सकते हैं। रोपाई से पूर्व पौध की जड़ों को इमिड़ाक्लोप्रिड़ 1 % घोल मे 15-20 मिनट डुबोकर उपचारित करें ताकि चूसक कीटो के प्रकोप से बचा जा सकें। बुवाई से पूर्व 10-12 टन प्रति एकड़ की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद खेतो में जुताई के समय उपयोग करें

9.    मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि कद्दूवर्गीय सब्जियों (लोकी, टिंडा, तूरई, सीताफल, ककड़ी, करेला, तरबूज, खरबूजा आदि)की बुवाई करें। बुवाई से पूर्व बीजों को केप्टान या थीरम 2.0 ग्राम/कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें। बुवाई से पूर्व 10-12 टन प्रति एकड़ की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद खेतो में जुताई के समय उपयोग करें

10.  इस मौसम में प्याज की समय से बोयी गई फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। कीट के पाये जाने पर कानफीड़ोर @ 0.5 मिली./ 3 ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि(1.0 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें तथा नीला धब्बा रोग की निगरानी करते रहें। रोग के लक्षण पाये जाने पर डाएथेन- एम-45 @ 3 ग्रा./ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि(1 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें।

11.  टमाटर,मटर,बैंगन व चनाफसलों में फलों/फल्लियों को फल छेदक/फली छेदक कीट से बचाव हेतु किसान खेत में पक्षी बसेरा लगाए। वे कीट से नष्ट फलों को इकट्ठा कर जमीन में दबा दें। साथ ही फल छेदक कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो बी.टी. 1 ग्राम/लीटर पानी या स्पिनोसेड कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।

12.   इस मौसम में गेंदे में पूष्प सड़न रोग के आक्रमण की सम्भावना बढ जाती है अत: किसानों को सलाह है कि फसल की निगरानी करते रहें यदि लक्षण दिखाई दें तो बाविस्टिन 1 ग्राम\लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक  

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग