मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

                     कृषि भौतिकी संभाग                               

  भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-24, क्रमांक :- 38/2017-18/बुध.  समय अपराह्न  2.30 बजे      दिनांक:16-08-2017

बीते सप्ताह का मौसम (10 से 16 अगस्त, 2017)

                     सप्ताह के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल रहे। 10अगस्त को 10.8 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई।दिन का अधिकतम तापमान 31.8 से 35.7 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 33.5 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 25.1 से 26.8 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 26.4 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 85 से 94 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 64 से 94 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 3.5 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 6.3 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 8.3 कि.मीप्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 5.3 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 3.9 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.0 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा पश्चिम  दिशाओं से रही।

 

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

17-08-17

18-08-17

19-08-17

20-08-17

21-08-17

वर्षा (मि.मी.)

 0.0

 2.0

 8.0

 3.0

   2.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

 38

 37

 34

   34

   34

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

 28

 28

 27

   27

 27

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

 4

 5

 7

 7

 6

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

 70

 80

 90

 85

 85

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

 50

 55

 60

 55

 50

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

 20

 07

 13

 07

   14

हवाकीदिशा

   पश्चिम

पूर्व-दक्षिण

-पूर्व      

पूर्व-दक्षिणपूर्व

  पूर्व-दक्षिण

-पूर्व     

  पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                                  15.0           

























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
21 अगस्त, 2017 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

 

1.        धान की फसल इस समय मुख्यत: वानस्पतिक वृद्वि की स्थिति में है अत: फसल में कीटों की निगरानी करें तना छेदक कीट की निगरानीहेतू फिरोमोन प्रपंच @ 3-4 /एकड़ लगाए। यदि पत्त्ता मरोंड या तना छेदक कीट का प्रकोप अधिक हो तो करटापदवाई 4% दानें या कार्बोफूरान 3% दानें 10 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।

2.     इस समय धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट होपर का आक्रमण आरंभ हो सकता है अतः किसान भाई खेत के अंदर जाकर पौध के निचली भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें। यदि प्रकोप दिखाई दें तो फेनोबुकार्ब 50 ई.सी. @ 1 मि. ली./ लीटर या बुप्रोफिजिन 25 ई.सी. @ 2 मि. ली./ लीटर या डी. डी. वी. पी. 76 ई.सी. @ 2 मि. ली./ लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।

3.  मक्का में तना छेदक कीट की निगरानी करें। बचाव के लिए ट्राईको-कार्ड @ 4/ एकड़ का उपयोग करें। यदि प्रकोप अधिक दिखाई दे तो कार्बोफुरान 3% दानें 8.0 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।

4.  सोयाबीन की खडी फसल में यदि सफ़ेद मक्खी, चूसक कीटों का प्रकोप अधिक हो तो थायामिथोजाम 25% दानें @ 40 ग्राम/एकड़ पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।

5.   मूंग, उडद में यदि सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप अधिक हो तो ट्राईजोफाँस 40 ई.सी. @ 1 मि.ली./लीटर में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।

6.     इस मौसम में किसानों को सलाह है कि, कपास में रस चूसने वाले कीटों की नियमित निगरानी करें। बेधक कीटों से निगरानी के लिए फिरोमोन प्रपंच @ 3-4 /एकड़ का उपयोग कर सकते है  तथा चूसक कीटों का प्रकोप अधिक हो तो ट्राईजोफाँस 40 ई.सी. @ 1 मि. ली./ लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें। बेधक कीटों का प्रकोप अधिक हो तो स्पेनोसे दवाई 1.0 मि.ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।

7.    इस मौसम में किसानों को सलाह है कि, स्वीट कोर्न (माधुरी, विन ओरेंज)  तथा बेबी कोर्न (एच एम-4)की बुवाई मेड़ों पर करें।

8.    इस मौसम में किसानों को सलाह है कि, गाजर (उन्नत किस्म- पूसा वृष्टि) की बुवाई मेड़ो पर करें। बीज दर 4.0-6.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें तथा खेत तैयार करते समय खेत में देसी खाद और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें।

9.      सब्जियों में (टमाटर, मिर्च, बैंगन फूलगोभी पत्तागोभी) फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी पत्तागोभी में डायमं बेक मोथ की निगरानी हेतू फिरोमोन प्रपंच @ 3-4/एकड़ लगाए तथा प्रकोप अधिक दिखाई दे तो स्पेनोसे दवाई 1.0 मि.ली./4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।

10.  इस मौसम में किसानों को सलाह है कि यदि टमाटर, मिर्च, बैंगन फूलगोभी पत्तागोभी की पौध तैयार है तो मौसम को मध्यनजर रखते हुए रोपाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें। तथा जल  निकास का उचित प्रबन्ध करें।

11.  इस मौसम में किसानों को सलाह है कि फूलगोभी की पूसा शरद, पूसा हाइब्रिड-2 पंत शुभ्रा (नवम्बर-दिसम्बर) की रोपाई हेतु पौध तैयार करना शुरु करें। खरीफ प्याज की तैयार पौध की रोपाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें।तथा जल  निकास का उचित प्रबन्ध करें।

12. किसानों को सलाह है कि इस समय सरसों साग-पूसा साग-1, मूली-वर्षा की रानी,समर लोंग, लोंग चेतकी; पालक- आल ग्रीन तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें।

13. कद्दूवर्गीय सब्जियों को ऊपर चढाने की व्यवस्था करे ताकि वर्षा से सब्जियों की लताओं को गलने से बचाया जा सके।

14. कद्दूवर्गीय एवं अन्य सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है क्योंकि, वे परांगण में सहायता करती है इसलिए जितना संभव हो मघुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दें। कीड़ों एवं बीमारियों की निरंतर निगरानी करते रहें, कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क रखें व सही जानकारी लेने के बाद ही दवाईयों का प्रयोग करें। फलमक्खी से प्रभावित फलों को तोड़कर गहरे गड्डे में दबा दें, फलमक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ (मैलाथियान10%) का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें ताकि फलमक्खी का नियंत्रण हो सके।

15. मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। उसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।

16.     भिंडी, मिर्च तथा बैंगन की फसल में माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक माईट पाये जाने पर फासमाईट @ 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी तथा जैसिड और होपर कीट के रोकथाम के लिए रोगोर कीटनाशक @ 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।

17.   इस मौसममें किसानों को सलाह है कि अपनी फसलों व सब्जियों में निराई-गुडाई का कार्य शीघ्र करें

18.     कीटों की रोकथाम के लिए प्रकाश प्रपंश(Light trap)  का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और थोडा मिट्टी का तेल या थोडा रोगोर मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें। इस प्रपंश से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।

19.  फलों के नऐ बाग लगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता के पौधों का प्रबन्ध करके इनकी रोपाई अतिशीघ्र करें।

20. गेदें के फूलों की (पूसा नारंगी) पौध छायादार जगह पर तैयार करें तथा जल निकास का उचित प्रबन्ध रखे।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक     

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग