मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

                               कृषि भौतिकी संभाग                                    

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-24, क्रमांक :- 23/2017-18/शुक्र       समय अपराह्न  2.30 बजे      दिनांक:23-06-2017

बीते सप्ताह का मौसम (17 से 23 जून, 2017)

                     सप्ताह के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल रहे। 17जूनको 8.2 मि.मी, 19 जून को 4.6 मि.मी, 2जून को 97.2 मि.मी, 21 जून को 19.6 मि.मी तथा 22 जून को 16.8 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई।दिन का अधिकतम तापमान 31.0 से 36.0 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 37.3 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 21.6 से 25.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 27.0 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 79 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 60 से 89 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 4.0घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 6.8 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 5.5 कि.मीप्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 7.2 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.7 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 9.2 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही तथा अपराह्न को अधिकतर पश्चिम दिशा से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

24-06-17

25-06-17

26-06-17

27-06-17

28-06-17

वर्षा (मि.मी.)

 0.0

 2.0

 5.0

 20.0

   20.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

 37

 37

 36

   31

   30

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

 27

 28

 29

   26

 25

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

 3

 4

 4

 6

 7

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

 90

 90

 95

 95

 95

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

 60

 60

 60

 70

 70

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

 10

 09

 10

 07

   13

हवाकीदिशा

पश्चिम-उत्तर

-पश्चिम

पश्चिम-दक्षिण

-पश्चिम  

पश्चिम-उत्तर

-पश्चिम

दक्षिण-दक्षिण

-पूर्व

दक्षिण-दक्षिण

-पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                                    47.0        























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
28 जून, 2017 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  1. वर्षा की सम्भावना को ध्यान में रखते हूये किसानभाई इस सप्ताह मक्का की बुवाई कर सकते है। संकर किस्में ए एच-421 व ए एच-58 तथा उन्नत किस्में- पूसा कम्पोजिट-3, पूसा कम्पोजिट-4 की बुवाई शुरु कर सकते है। बीज की मात्रा 20 किलोग्राम/हैक्टर रखें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 से.मी. रखें। मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम / हैक्टर 800 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  2. जिन किसान भाईयों की धान की पौधशाला लग गयी हो वे ब्लास्ट तथा भूरा धब्बा रोग के लिए पौधशाला की निगरानी करते रहें तथा लक्षण पाये जाने परकार्बेन्डिजम 2.0 ग्राम/लीटर पानी घोल कर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  3. धान की पौधशाला मे यदि पौधों का रंग पीला पड रहा है तो इसमे लौह तत्व की कमी हो सकती है। पौधों की ऊपरी पत्तियॉ यदि पीली और नीचे की हरी हो तो यह लौह तत्व की कमी दर्शाता है। इसके लिए 0.5 % फेरस सल्फेट +0.25 % चूने के घोल का छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  4. यह समय चारे के लिए ज्वार तथा लोबिया की बुवाई के लिए उप्युक्त हैं अतःकिसानभाई पूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें बीज की मात्रा 40 किलोग्राम/हैक्टर रखें ।
  5. खेतों को समतल करके एक जुताई करें जिससें खाद अच्छी तरह से मिल जाय तथा हानिकारक कीटों व खरपतवार के बीजों सें बचाव हो सकें। वर्षा को ध्यान में रखते हुए किसान भाई अपने खेतों में मेड़ों को बनाने का कार्य शीघ्र करें। मेडें चोडी तथा ऊँची होनी चाहिए।
  6. वर्षा को मध्यनजर रखते हुए टमाटर, हरी मिर्च, बैंगन व अगेतीफूलगोभी की पौधशाला में जल निकास का उचित प्रबन्ध रखेंअगले तीन दिनों तक खड़ी फसलों,सब्जियोंमें किसी तरह का छिड़काव ना करें।
  7. कद्दूवर्गीय सब्जियोंकी वर्षाकालीन फसल की बुवाई करें लौकी की उन्नत किस्में पूसा नवीन,पूसा समृधि, करेला- पूसा विशेष, पूसा दो मौसमी, सीताफल- पूसा विश्वास, पूसा विकास। तुरई- पूसा चिकनी, धारीदार तुरई- पूसा नसदार आदि किस्मों की बुवाई करें।
  8. इस मौसममें किसान ग्वार, बाजरा, लोबिया, भिंडी, सेम, पालक, चौलाई आदि फसलों की बुवाई के लिए खेत तैयार हो तो बुवाई कर सकते हैं। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।
  9. किसान भाई कद्दूवर्गीय सब्जियोंमें फल मक्खी की निगरानी करते रहें इसके लिए मिथाइल यूजीनोल ट्रेप का प्रयोग कर सकते हैं। फल मक्खी के लक्षण पाये जाने पर रोगोर @ 2 मि.ली. + 10 ग्राम चीनी/गुड़ प्रति ली. पानी में मिलाकर 50 लीटर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें
  10. मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। उसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मि.ली./लीटर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  11. फलों के नऐ बाग लगाने वाले गड्डों की खुदाई कर उनको खुला छोड दें ताकि हानिकरक कीटो-रोगाणु तथा खरपतवार के बीज आदि नष्ट हो जावें।
  12. वर्षा को ध्यान में रखते हुऐ किसानभाईयो को सलाह है कि वे अपने खेतो के किसी एक भाग में वर्षा के पानी को इकट्ठा करने की व्यवस्था करें जिसका उपयोग वे वर्षा न आने के दौरान फसलों की उचित समय पर सिंचाई के लिए कर सकते हैं।
  13. देशी खाद(सड़ी-गली गोबर की खाद, कम्पोस्ट) का अधिकाधिक प्रयोग करें ताकि भूमि की जलधारण क्षमता और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ सके।मृदा जाचँ के उपरांत उवर्रको की संतुलित मात्रा का उपयोग करें, खासतौर पर पोटाश की मात्रा बढ़ाएं ताकि फसल की सूखे से लड़ने की क्षमता बढ़ सके।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग