मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

       भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 05/2018-19/मंग.   समय:     अपराह्न  2.30 बजे         दिनांक:17-04-2018

बीते सप्ताह का मौसम (11 से 17 अप्रैल, 2018)

     सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा। 12 अप्रैल को 8.6 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 33.0 से 38.5 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 34.8 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 14.8 से 21.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 18.0 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 48 से 82 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 16 से 48 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 6.8 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 8.8 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 4.0 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 5.1 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 5.6 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 7.9 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा अधिकतर शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

18-04-18

19-04-18

20-04-18

21-04-18

22-04-18

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

2.0

0.0

   0.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

38

38

39

36

   36

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

22

23

23

   24

21

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

4

4

5

4

2

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

66

65

70

65

65

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

27

25

30

25

20

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

   10

10

10

10

10

हवाकीदिशा

पश्चिम

पश्चिम

पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

विशेषमौसम

दिल्ली एनसीआर में 20 अप्रैल 2018 को गर्जन के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना है|

 


























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
22 अप्रेल, 2018 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   20 अप्रैल को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में तेज हवा के साथ हल्की वर्षा होने की सम्भावना को ध्यान में रखते हुए कटी हुई फसलों को बाँधकर रखे अन्यथा तेज हवा या आंधी से फसल एक खेत से दूसरे खेत में जा सकती हैवर्षा होने की सम्भावना को देख़ते हुए कटी हुए फसल को ढक कर रखें

2.   अनाज को भंडारण में रखने से पहले भंडार घर की अच्छी तरह सफाई करें तथा अनाज को अच्छी तरह से सुखा लें एवं कूड़े-कचरे को जला या दबा कर नष्ट कर दें। भंडारघर की छ्त, दीवारों और फर्श पर एक भाग मेलाथियान 50  .सी.को 100 भाग पानी में मिला कर छिड़काव करें। यदि पुरानी बोरियां प्रयोग करनी पड़े तो उन्हें एक भाग मेलाथियान व 100 भाग पानी के घोल में 10 मिनट तक भिगो कर छाया में सुखा लें।

3.   मूंग की फसल की बुवाई हेतु किसान उन्नत बीजों की बुवाई शुरू करें। मूंग पूसा विशाल, पूसा 672, पूसा 9351, पंजाब 668। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।  बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फाँस्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचार करें।

4.   वर्तमान तापमान फ्रेंच बीन, सब्जी लोबिया, चौलई, भिंण्डी, लौकी, खीरा, तुरई आदि तथा गर्मी के मौसम वाली मूली की सीधी बुवाई हेतु अनुकूल है क्योंकि, बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।  उन्नत किस्म के बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से लेकर बुवाई करें।

5.   रबी फसल यदि कट चुकी है तो उसमें हरी खाद के लिए खेत में पलेवा करें। हरी खाद के लिए ढ़ेचा, सनई अथवा लोबिया की बुवाई की जा सकती है। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।

6.   ग्वार, मक्का, बाजरा, लोबिया आदि चारा फसलों की बुवाई इस सप्ताह कर सकते है। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है। बीजों को 3-4 से.मी. गहराई पर डाले और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 से.मी. रखें।

7.   इस मौसम में बेलवाली सब्जियों में लाल भृंग कीट के आक्रमण की संभावना रहती है, यदि कीट की संख्या अधिक हो तो ड़ाईक्लोरवाँस (डी.डी.वी.पी.) 76 ई.सी.@ 1 ग्राम/लीटर पानी की दर से छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।

8.   इस मौसम में बेलवाली सब्जियों और पछेती मटर में चूर्णिल आसिता रोग के प्रकोप की संभावना रहती है।  यदि रोग के लक्षण अधिक दिखाई दे तो कार्बंन्डिज्म @ 1 ग्राम प्रति लीटर पानी दर से छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।

9.   इस मौसम में भिंडी की फसल में माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर इथेयाँन @ 1.5-2 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।

10.प्याज की फसल में इस अवस्था में उर्वरक न दे अन्यथा फसल की वनस्पति भाग की अधिक वृद्धि होगी और प्याज की गांठ की कम वृद्धि होगी। 

11.इस मौसम में समय से बोयी गई प्याज की फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। कीट के अधिक पाये जाने पर कार्बारिल @ 2 ग्रा. प्रति लीटर पानी की दर से किसी चिपचिपा पदार्थ (स्टीकाल, टीपाल आदि) के साथ मिलाकर छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।

12.बैंगन तथा टमाटर की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। साथ ही कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड़ कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।

13.रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दे ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडो के अण्डे तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग