मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

     भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-26, क्रमांक:- 22/2019-20/शुक्र.           समय: अपराह्न  2.30 बजे                 दिनांक: 14-06-2019

बीते सप्ताह का मौसम (08 से 14 जून, 2019)

        सप्ताह के दौरान आसमान में हल्के बादल छाये रहें। दिन का अधिकतम तापमान 39.6 से 46.2 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 38.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 26.1 से 31.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 27.0 डिग्री सेल्सियस)रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 40 से 73 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 23 से 44 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 9.2 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 7.6 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 5.0 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक सामान्य 7.5 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 8.4 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 10.7 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक

15-06-19

16-06-19

17-06-19

18-06-19

19-06-19

वर्षा (मि.मी.)

0.0

3.0

4.0

2.0

1.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

42

39

39

41

41

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

30

31

29

29

29

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

4

7

7

7

6

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

55

65

65

65

60

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

30

35

35

40

40

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

30

30

25

15

25

हवा की दिशा

उत्तर-उत्तर- पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर- पश्चिम

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                                                 10.0

विशेष

दिल्ली एनसीआर में अगले पाँच दिनों धूलभरी  आँधी चलनेकीसम्भावनाहै।

 






















साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
19 जून, 2019 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   वर्तमान मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को धान की नर्सरी तैयारी करने की सलाह है। एक हैक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई करने हेतु लगभग 800-1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में पौध तैयार करना पर्याप्त होता है। नर्सरी के क्षेत्र को 1.25 से 1.5 मीटर चौडी तथा सुविधानुसार लम्बी क्यारियों में बाँटे। पौधशाला मेंबुवाई से पूर्व बीजोपचार के लिए 5.0 किलोग्राम बीज के लिए बावस्टिन 10-12 ग्राम और 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाइक्लिन को 10 लीटर पानी में घोल लें। आवश्यकतानुसार इस घोल को बनाकर इसमें 12-15 घण्टे के लिए बीज को डाल दें। उसके बाद बीज को बाहर निकालकर किसी छायादार स्थान में 24-36 घण्टे के लिए ढककर रखें और पानी का हल्का-हल्का छिडकाव करते रहें । बीज में अंकुर निकलने के बाद पौधशाला में छिडक दें। अधिक उपज देने वाली किस्में:- पूसा 44. पंत धान 4, पंत धान 10, पूसा 834, पूसा बासमती 1, पूसा इम्प्रूप्ड बासमती, पूसा सुगंध 5, पूसा सुगंध 4 (पूसा 1121), रनबीर बासमती।

2.  अरहर की बुवाई इस सप्ताह कर सकते है। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। अच्छे अंकुरण के लिए खेत में पर्याप्तनमी होनी आवश्यक है। किसानों से यह सलाह है कि वे बीजों को बोने से पहले अरहर के लिए उपयुक्त राईजोबियम तथा फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाले जीवाणुओं (पीएसबी)/फँफूद के टीकों से उपचार कर लें। इस उपचार से फसल के उत्पादन में वृद्धि होती है। उप्युक्त किस्में:- पूसा 2001, पूसा 992, पारस  तथा मानक

3. यह समय अगेती फूलगोभी, टमाटर, हरी मिर्च और बैंगन की पौधशाला बनाने के लिए उपयुक्त है, अतः किसान यह प्रयास करें कि वे कीट अवरोधी नाईलोन की जाली का प्रयोग करें ताकि रोग फैलाने वाले कीटों से फसल को बचा सकें। पौधशाला को तेज धूप से बचाने के लिए 40 % छायादार नेट द्वारा 6.5 फीट की ऊँचाई पर ढक सकते हैं। बीजोंकोकेप्टानया थीराम @ 2-2.5 ग्रा./कि.ग्रा. की दर से उपचार के बाद पौधशाला में बुवाई करें।

4.  इस मौसम में बेलवाली फसलों में न्यूनतम नमी बनाएं रखें अन्यथा मृदा में कम नमी होने से पुष्पन एंव परागण पर असर हो सकता है जिससे फसल उत्पादन में कमी आ सकती है।

5.      मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। आवश्यकतानुसार फसल में कम अंतराल में सिंचाई करें।

6.  भिंडी की फसल में तुड़ाई के बाद यूरिया @ 5-10 किलो प्रति एकड़ की दर से डाले तथा उसके उपरांत सिंचाई करें। साथ ही तापमान को ध्यान में रखते हुए माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। इस मौसम में भिंडी की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।

7.  तापमान को देखते हुए,किसान तैयार सब्जियों की तुड़ाई सुबह या शाम को करें तथा इसके बाद इसे छायादार स्थान में रखें।

8.  इस मौसम में किसान अपनी मिट्टी की जांच किसी प्रमाणित स्रोत से करवाएं और जहाँ संभव हो अपने खेत को समतल करवाएं।

9.  फलों के नऐ बाग लगाने वाले गड्डों की खुदाई कर उनको खुला छोड दे ताकि हानिकरक कीटो-रोगाणु तथा खरपतवार के बीज आदि नष्ट हो जावे।

  सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष,कृषि भौतिकी संभाग)

डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार(प्रधान वैज्ञानिक,सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग